याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य इससे पहले भी समय ले चुका है। इसके बाद अदालत ने राज्य को एक सप्ताह के भीतर संक्षिप्त रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया।
कोलकाता। भारत और बांग्लादेश की सीमा पर कांटेदार तार लगाने में विलंब को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अंतरराष्ट्रीय सीमा के कई किलोमीटर हिस्से में फेंसिंग न होने के आरोप पर गत 13 नवम्बर को अदालत ने राज्य सरकार से हलफनामा तलब किया था। मामले की सुनवाई जब मुख्य न्यायाधीश के कार्यवाहक डिविजन बेंच में फिर से शुरू हुई, तब राज्य ने अपना पक्ष रखने के लिए दोबारा समय मांगा।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य इससे पहले भी समय ले चुका है। इसके बाद अदालत ने राज्य को एक सप्ताह के भीतर संक्षिप्त रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया। बेंच ने स्पष्ट कहा कि यदि रिपोर्ट में सकारात्मक प्रगति नहीं दिखाई देगी, तो इस मामले में लगातार सुनवाई होगी। अदालत का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कांटेदार तार लगाने का मुद्दा सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसमें ज़्यादा समय नहीं दिया जा सकता।
सुनवाई के दौरान केंद्र के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए बताया कि केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद सीमा पर कांटेदार तार लगाने के लिए भूमि अधिग्रहण संबंधी धनराशि राज्य को दे दी गई है, लेकिन इसके बावजूद राज्य की ओर से उचित पहल दिखाई नहीं दे रही है।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश सीमा के कई किलोमीटर क्षेत्र में कांटेदार तार नहीं होने के कारण घुसपैठ और तस्करी बिना रोकटोक जारी है। शिकायत के अनुसार भूमि अधिग्रहण को लेकर राज्य की निष्क्रियता ही फेंसिंग कार्य में बाधा बन रही है।